मैं तेरी परछाई हूँ, तू समझ सके तो समझ… – Penmyth | Your writeup platform

मैं तेरी परछाई हूँ, तू समझ सके तो समझ…

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मैं तेरी परछाई हूँ, तू समझ सके तो समझ ।

मैं वो हूँ , जो तुझसे तुझसे ज्यादा जानता हूँ,

तेरे दिए हर ग़म को ख़ुशी ख़ुशी मानता हूँ ।

सोचा ना था , एक रोज़ भीड़ में खो जाऊँगा,

और अचानक से तुझसे यूं ही तुझसे दूर हो जाऊँगा ।

दुनिया की भीड़ में होते हुए हरदम,

चलता हूँ तेरे साथ मेरे हमदम ।

पर काश तुझे तेरे पीछे चलने वाली परछाई का एहसास हो सके ।

सोचा तेरे प्यार में सब कुछ आसान करके जाऊँगा ।

या तो मैं तुझे भूल जाऊँगा , या मै तुझे बहुत याद आऊँगा ।

पर किस्मत का उल्टा दरवाज़ा देख,

ना मैं भुला पाया , ना तूने मुझे कभी याद किया ।

मैं तो तेरी परछाई हूँ, तू समझ सके तो समझ ।

चलते चलते थक गया हूँ, तेरे दर पर वापिस आ गया हूँ ।

तू थाम ले दमन मेरा , संग चल सके तो चल …

मैं तो तेरी परछाई हूँ, तू समझ सके तो समझ ।

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